लडैती तेरी कृपा कहिय न जाइ।

Siddhanta Pada —

Verse 30 of 63

लडैती तेरी कृपा कहिय न जाइ। छिन छिन प्रति अति पोषत तोषत आनंद उर न समाइ॥ [1] अपनी कहि कहि रंग बढावत हँसि हँसि कंठ लगाइ। श्री हरिदासी रसिक सिरोमनि छकी रहें महा भाइ॥ [2] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (139) योद्धा को अपना आशीर्वाद कहें, जय। छिन छिन प्रति अति पोषात् तोषत् आनंद उर न समाई.. [1] अपनी कहि कहि रंग बधावत हंसी हंसी कंठ लागै। श्री हरिदासी रसिक सिरोमनि छकि रहन महा भाई.. [2] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत पद (139)
लड़ैती तेरे चरण महा सुखदाई।ललिता बिनु क्यों राधा पैयेयै।