ललिता बिनु क्यों राधा पैयेयै।

Siddhanta Pada —

Verse 31 of 63

ललिता बिनु क्यों राधा पैयेयै। कुँवरि प्रान जीवन बिनु, राधा रस कैसैं दुलरैयै॥ [1] जाकी सुजस सुरस सलिता बिनु, कैसैं कै भव ताप मिटैयै। जाकौ नाम कुँवरि वंशी रस बिन गायैं कैसैं कै अघैयै॥ [2] - श्री वंशी अलि, सिद्धांत के पद (40) क्यों ललिता बिनु राधा पाई? प्राणहीन कुंवारी आत्मा राधा के प्रेम को कैसे संजोएगी? [1] जाकी सुजस सुरस सलिता इसके बिना, कैसे बुझेगी किसी की तपस्या। जाकौ नाम कुंवारी वंशी रस बिन गाय गाये कैसे का अघैयै.. [2] - श्री वंशी अली, छंद के सिद्धांत (40)
लडैती तेरी कृपा कहिय न जाइ।(सवैया)