मोहि भरोसौ स्वामी जी को।

Siddhanta Pada —

Verse 36 of 63

मोहि भरोसौ स्वामी जी को। करि हैं अपनों आप बरोबरि, प्रान अधार है पीकौ॥ [1] विषे वासना जारि खेह करि, उपजै हैं हित नीकौ। श्रीरसिकविहारी-बिहारिनि तन मन, और लगे सब फीको॥ [2] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (127) मोहि भरोसा स्वामी जी पर। मैं अपनी बारी कर रहा हूं, मेरा जीवन अधर में है, पिकाउ.. [1] विशेष वासना जारी है, कह रही है, यह उपज देने वाला हिट निको है। श्रीरसिकविहारी-बिहारिणी तन-मन सब व्यस्त.. [2] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू के वचन, सिद्धांत (127)
मो निर्धन की ललिता संपति।नैंन बिहारी रूप निरखि, रसन बिहारी नाम।