प्रीतम कुंवरि चरन बिनु को है।

Siddhanta Pada —

Verse 41 of 63

प्रीतम कुंवरि चरन बिनु को है। अप अपने स्वारथ जग अटक्यौ, तासों को सुख तो है॥ [1] एहो परम उदार कृपानिधि, स्वामिन भजत सकल सुख यो है॥ जयश्री बंसी अलि अन रज निस नहीं, तज भजन नित सोहै॥ [2] - श्री वंशी अलि, सिद्धांत के पद (24) बीनू का बैचलर फेज बहुत अच्छा है. एपी अपने स्वरथ जग अटकयौ, तासों को सुख तो है.. [1] हे परम उदार कृपानिधि, स्वामिन भजत सकल सुख यो है.. जयश्री बंसी अली अन राज निस नहीं, तज भजन नित सोहै.. [2] - श्री वंशी अली, सिद्धांत के पद (24)
नृपति निकुंज विहारनि रानी।प्रीति तौ श्री राधा ही सों कीजै।