सुनो जी कानैं नूपूररो झनकार।
Siddhanta Pada —
Verse 60 of 63
सुनो जी कानैं नूपूररो झनकार।
कुंवर लडैती करहु आपनी, दरसों नित्य बिहार॥ [1]
यह तन तजि तन परिकर पाऊँ, श्री ललिता प्राण आधार।
तुव जस कुंजन कुंजन गाऊँ, (जय श्री) वंशी अलि बलिहार॥ [2]
- श्री वंशी अलि, सिद्धांत के पद (32)
सुनो कानन नुपुरारो झंकार। कुँवर लड़ैती करहु अपनी, दरसों नित्य बिहार।।[1] यह शरीर, शरीर, शरीर, शरीर श्री ललिता के अधीन है। तुव जस कुंजन कुंजन गौं, (जय श्री) वंशी अली बलिहार.. [2] - श्री वंशी अली, छंद के सिद्धांत (32)