चलु मन श्री वृन्दावन ओर

Snket Lata — श्री संकेत अली

Verse 3 of 9

(कवित्त) देखिके चरण चालि लाजत मराल गज, नखन प्रकाश लखि भावत न चंदरी। [1] एड़ी लाल मृदुल निहारि बारि जात बारि, बारि में रहत सम लहत न मंदरी॥ [2] नुपुरकी ध्वनि सुनि मोहत मनोज मन, सोहत महावर अनूप छवि कंदरी। [3] सौरभ लुनाई तट फैलत चलत संग, आवत संकेत अलि प्यारी नंदनंद री॥ [4] - श्री संकेत अलि, संकेत लता (कविता) देके चरण चली लजात मरल गज, नखं प्रकाश लखि भवति न चांदरै। [1]. [3] सौरभ लुनई तत फेलत चलत संग, आवत संकेत अली प्यारी नंदानंद री.. [4] - श्री संकेत अली, संकेत लता
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