चलु मन श्री वृन्दावन ओर
Snket Lata — श्री संकेत अली
Verse 4 of 9
गति गरवीली देखि के, मानत मन में लाज।
याही ते लै धूरि निज, शिर डारत गजराज॥
- श्री संकेत अली, संकेत लता (92)
आंदोलन को गर्व की दृष्टि से देखना, मन में शर्म महसूस करना। याहि ते लै धूरि निज, शिर दरत गजराज.. - श्री संकेत अली, संकेत लता (92)