ठाड़े मनमोहन सुन्दर यमुना

Sur Sagar — श्री सूरदास

Verse 59 of 92

(राग अडानो) ठाड़े मनमोहन सुन्दर यमुना तीर री। जबते दृष्टि परि या मुख पे तबते धरत न धीर री॥ [1] मृगमद तिलक अलक घुंघरारी नासा मुक्ता कीर री। सूरदास प्रभु वेणु बजावत थक्यो सरिता नीररी॥ [2] - श्री सूरदास, सूर सागर (राग अदाणो) ठाढ़े मनमोहन सुन्दर यमुना तीर री। जब भी मैंने अपने मुख की ओर देखा, पृथ्वी बेचैन हो गई.. [1] मृगतृष्णा, तिलक, घुंघराले बाल, नाक मुक्त हो गई। सूरदास प्रभु वेणु बजावत थाक्यो सरिता निरारी.. [2] - श्री सूरदास, सूर सागर
राधे तेरौ बदन बिराजत नीकौहम अहीरि कह जानईं जोग जुगुति की रीति