सब तजि भजिऐ नंद कुमार
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 88 of 92
(राग केदारौ)
सब तजि भजिऐ नंद कुमार।
और भजे तैं काम सरै नहिं, मिटै न भव-जंजार॥ [1]
जिहिं जिहिं जोनि जन्म धारयौ, बहु जोरयौ अघ को भार।
तिहिं काटन कौं समरथ हरि कौ, तीछन नाम-कुठार॥ [2]
वेद, पुरान, भागवत, गीता, सब कौ यह मत सार।
भव-समुद्र हरि-पद-नौका बिनु, कोउ न उतारै पार॥ [3]
यह जिय जानि, इहीं छिन भजि, दिन बीते जात असार।
सूर पाइ यह समौ लाहु लहि, दुर्लभ फिरि संसार॥ [4]
- श्री सूरदास, सूरसागर
(राग केदारौ) सब तजि भजैयै नन्द कुमार। और भजे था काम सरै नहीं, मिटै न भाव-जंजर.. [1] जिहिन जिहिन जोनि जन्म धरयौ, बहु जोरयौ आगा को भार। हरि को परास्त करने में कौन सक्षम है? [2] वेद, पुराण, भागवत, गीता ये सब इसी मत का सार हैं। भव-समुद्र हरि-पद-नौका बिनु, कोई पार नहीं पा सकता... सुर पै ये समौ लहु लाहि, दुर्लभ फिर जग। [4] - श्री सूरदास, सूरसागर