सुने री मैंने निरबल के बल राम
Sur Sagar — श्री सूरदास
Verse 90 of 92
(राग भैरवी तीन ताल)
सुने री मैंने निरबल के बल राम।
पिछली साख भरूँ सन्तन की, अड़े सँवारे काम॥ [1]
जब लगि गज बल अपनो बरत्यो, नेक सरो नहिं काम।
निरबल ह्वै बलराम पुकार्यो, आये आधे नाम॥ [2]
द्रुपद सुता निरबल भई ता दिन, तजि आये निज धाम।
दुस्सासन की भुजा थकित भई, बसन रूप भये श्याम॥ [3]
अपबल तपबल और बाहुबल, चौथो है बल दाम।
सूर किसोर कृपा ते सब बल, हारे को हरिनाम॥ [4]
- श्री सूरदास, सूरसागर
(राग भैरवी तीन ताल) सुनो राम, मैं निर्बल का बल हूं। भरुण संतन का आखिरी दोस्त अच्छा काम करने पर अड़ा था.. [1] जब उसे अपनी शादी का दबाव महसूस हुआ तो उसने कोई अच्छा काम नहीं किया। मैं निर्बल हूं, बलराम पुकारते हैं, हे आधे नमः.. [2] द्रुपद सोता है, भाई मैं निर्बल हूं, यही मेरा निवास है। दुस्सासन की भुजाएं थक गई हैं भाई, बसन का मुख लज्जित है। [3] उपबल, तपबल और बाहुबल, चौथा है बाल बांध। सूर किशोर कृपा सब बल देत, हारे सो धन्य। [4] - श्री सूरदास, सूरसागर