तीर्थानंद

Tirthannda

श्री नागरीदास · 3 verses · Braj

  1. 1. ऐसौ बरसानों निरखि गहबर आयो प्रेम
  2. 2. ऐसौ बरसानों निरखि गहबर आयो प्रेम
  3. 3. ऐसौ बरसानों निरखि गहबर आयो प्रेम