ऐसौ बरसानों निरखि गहबर आयो प्रेम
Tirthannda — श्री नागरीदास
Verse 2 of 3
गौर-साँवरे रसिक दोऊ, यह दीजे सुखरास।
कबहु नागरीदास अब, तजैं न ब्रज को वास॥
- श्री नागरीदास जी, श्री नागरीदास जी की वाणी, तीर्थानंद (107)
गोरी चमड़ी वाली रोमांटिक जोड़ी, ये दीजे सुखारस। नागरीदास जी अब कब, न ताजिन जीतेंगे न ब्रज.. - श्री नागरीदास जी, श्री नागरीदास जी के वचन, तीर्थानन्द (107)