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Vani Granths
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उपदेश चिंतामणि
उपदेश चिंतामणि
Upadesh Granths
· 2 verses · Braj
1. रसिकन की रसना सदा जपै युगल को नाम
2. हों व्रज मागनों जू व्रज तजि अंत न जाऊँ जू