और कहाँ ते सुमरिये

Utkntha Madhuri — श्री माधुरी दास

Verse 1 of 15

अहो लड़ैती लाड़ली, अलखि लड़ी सुकुमारु। मन हरनी तरुनी तनक, दिखरावहु मुखचारु॥ - श्री माधुरी दास, उत्कंठा माधुरी (35) हे युद्ध प्रिय, सुकुमारु कठिन युद्ध कर रहे हैं। मन हरनि तरुनि तनक, दिखारावु मुखचारु.. - श्री माधुरी दास, उत्कंठ माधुरी (35)
और कहाँ ते सुमरिये