मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय
Vallabh Sakhi — गोस्वामी श्री हरिराय
Verse 1 of 18
बहुत दिना भटकट फिर्यो, कछु ना आयो साथ।
श्री वल्लभ सुमर्यो तबे, पर्यो पदारथ हाथ॥
- गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (10)
कई दिन तक भटकते रहे, लेकिन कुछ पता नहीं चला। श्री वल्लभ सुमरियो ताबे, परयो पदारथ हठ.. - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (10)