वल्लभ साखी
Vallabh Sakhi
गोस्वामी श्री हरिराय · 18 verses · Braj
- 1. मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय
- 2. मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय
- 3. मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय
- 4. मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय
- 5. मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय
- 6. मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय
- 7. मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय
- 8. मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय
- 9. मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय
- 10. मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय
- 11. मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय
- 12. मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय
- 13. मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय
- 14. मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय
- 15. मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय
- 16. मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय
- 17. मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय
- 18. मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय