मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय

Vallabh Sakhi — गोस्वामी श्री हरिराय

Verse 2 of 18

देखी देह सुरंग यह, मति भूले मन मांहि। श्री वल्लभ बिनु और कोऊ, तेरो संगी नाही॥ - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (38) देखो, यह शरीर की सुरंग है, मन को भूल जाओ। श्री वल्लभ बिनु और कुओ आपके साथी नहीं.. - गोस्वामी श्री हरिराय जी, वल्लभ साखी (38)
मन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होयमन नग ताको दीजिये जो प्रेम पारखी होय