धन-धन वृन्दावन यह नाउं

Van Jan Prashnsa —

Verse 2 of 5

धन्य-धन्य है जोई पुरान। ताके मध्य श्रीवृन्दावन की कथा परम सुखदान॥ [1] बिन वृन्दावन बानी मेरैं कबहुँ परो जिन कान। नागर व्रज-वृन्दावन बिनको नहिं भावत भगवान॥ [2] - श्री नागरीदास जी, वन जन प्रशंसा (3) धन्य है जोई पुराण। परम सुख लेवें, श्री वृन्दावन की कथा.. [1] वृन्दावन बिन कब याद आयेगी? नागर वृज-वृंदावन भगवान का अस्तित्व किसी के बिना नहीं है.. [2] - श्री नागरीदास जी, वन जन प्रश्न (3)
धन-धन वृन्दावन यह नाउंश्री वृंदावन योगपीठ गोविंद निवासा