श्री वृंदावन योगपीठ गोविंद निवासा
Van Jan Prashnsa —
Verse 3 of 5
नित्यानंद कदम्ब केलि, वृंदावन शोभा।
कोटि कोटि सुरराज रंक ह्वै, लागत लोभा॥
- श्री गदाधर भट्ट, श्री गदाधर भट्ट जी की वाणी, योग पीठ (14)
नित्यानन्द कदम्ब केलि, वृन्दावन शोभा। कितने करोड़ सूर्य हैं, कितना लोभ है... - श्री गदाधर भट्ट, श्री गदाधर भट्ट जी के शब्द, योग पीठ (14)