त्वदलोकन-कालाहि

Vilap Kusumanjali — श्री रघुनाथ दास गोस्वामी

Verse 4 of 12

हे श्रीसरोवर सदा त्वयि सा मदीशा प्रष्ठेन सार्द्धमिह खेलति कामरंगैः। त्वञ्चेत प्रियात् प्रियमतीव तयोरितीमां हा दर्शयाय कृपया मम जीवितं ताम्॥ - श्री रघुनाथ दास गोस्वामी, विलाप कुसुमांजलि (98) हे भगवान, झील हमेशा तुम्हारी आँखों से खेलती है। त्वयांचेत् प्रियतम प्राइममतीव तयोरितम् ह दर्शनाय कृपाय मम जीवितम् तम। - श्रीरघुनाथ दास गोस्वामी, विलाप कुसुमांजलि (98)
त्वदलोकन-कालाहित्वदलोकन-कालाहि