बिहारी लाल बाँकरे जू अनोखे
Vinay Ke Pada — श्री किशोरी अलि
Verse 3 of 7
हम सौं बाँक न कीजिये, सुनो बाँकेबिहारी।
ऐंड प्रिंया की सखिन सौं, निवहै न तिहारी॥ [1]
हौ अमनैत अचाँगरे, सब ही तैं बाँके।
पै प्रिया भौंह मरोर मैं, जकि रहे सु आँके॥ [2]
गरज परै जब आपनी, तब करत सुधाई।
भूल जात रस-छकनि में, यह कौन भलाई॥ [3]
- श्री किशोरी अलि जी, विनय के पद (51)
हमें बैंक मत करो, सुनो बांकेबिहारी। और प्रियंका की बहिन सौं, निवहै न तिहारी.. [1] हौ अमानैत अचंगारे, सब ही बनके। पा प्रिया मैं भौंहों के बीच में, जाकी रहे सु अनेके.. [2] जब गरज तेरी हो, तब तेरी याद आती है। रस-चूसने वाले को भूलने से क्या लाभ.. [3] - श्री किशोरी अली जी, विनय पद (51)