बिहारी लाल बाँकरे जू अनोखे

Vinay Ke Pada — श्री किशोरी अलि

Verse 4 of 7

जिन जिन अपराधिन सिर नायौ, रसना नाम उचारी। ते-ते निज परिकर में लीये, करि सेवा अधिकारी॥ [1] मेरी बार अबार करी किहि, हेत कहाँ सुकुंवारी ? करौ विचार ‘किशोरी’ हिय में, हाँसी होइ तिहारी॥ [2] - श्री किशोरी अलि जी, विनय के पद (37) जिन जिन प्राणिरन सर न्यौ, रसना नाम उचारी। समय-समय पर अपने प्रिय हृदय की सेवा करो.. [1] अब मेरा समय नहीं रहा, सुख कहाँ रहा? करु विचार 'किशोरी' हि पुरुष, हंसनि होइ तिहारी.. [2] - श्री किशोरी अली जी, विनय के पद (37)
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