बिहारी लाल बाँकरे जू अनोखे

Vinay Ke Pada — श्री किशोरी अलि

Verse 5 of 7

किशोरी, मोहि देहु वृन्दावन वास। कर करवा हरवा गुंजन के, कुंजन माँझ निवास॥ [1] नित्यबिहार निरखि निसि वासर, छिन छिन चित्त हुलास। प्रेम छकनि सौं छक्यौ रहौं नित, लखि दम्पति सुखरास॥ [2] देह-गेह सुधि-बुधि सब बिसरौं चरण-शरण की आस। बृजवासिन के मंदिर, घर-घर, रुचि कैं पाऊँ गास॥ [3] कुंजगली रसरली भली विधि, गाऊँ गुननि प्रकास। निज दासन सौं अंग-संग मिलि, करौं विनोद विलास॥ [4] आन धर्म व्रत नेम न ठानौं, चातृक चौंप पियास। 'किशोरीअली' माँगत कर जोरैं राखौ रसिकन पास॥ [5] - श्री किशोरी अलि जी, विनय के पद (23) किशोरी मोहि देहु वृन्दावन बसाई। नाद को नष्ट करो, नाद बीच में रह जाता है। [1] नित्य बिहार निरखि निसि वासर, छिन-छिन चित्त हुलास। आपको हर दिन सैकड़ों प्यार और खुशियाँ मिलें। [2] अपने शरीर की सारी चिन्ताएँ और चिन्ताएँ भूलकर आपके चरणों का आश्रय ले। घर-घर बृजवासिन मन्दिर, घर-घर हित। [3] कुंजगली रसरालि शुभ विधि, प्रकाश का गौण गुण। मेरे 100 आदमी नौकर से मिलें और आनंद लें। 'किशोरी अली' मंगत कर जोरैं राखौ रसिकन पास.. [5] - श्री किशोरी अली जी, विनय के पद (23)
बिहारी लाल बाँकरे जू अनोखेरुप हू के रुप तै अनूप रुप प्यारी को