अहो रसिक सुकुमारी करौ विनती कर जोरि

Vinay Kundaliyan — श्री अलबेली अलि

Verse 7 of 11

कवास ! कवास ! हो स्वामिनी, महाबहु सुख रासि। सरणागत प्रतिपाल कैं, पुजवौ मन की आस॥ - श्री अलबेली अलि, विनय कुंडलियाँ (6) कावस! कावस! हो स्वामिनी, महाबाहु सुख रासी। प्रतिपल समर्पण कर सकें, मन की आशा की आराधना कर सकें.. - श्री अलबेली अली, विनय कुण्डलिया (6)
अहो रसिक सुकुमारी करौ विनती कर जोरिअहो रसिक सुकुमारी करौ विनती कर जोरि