अहो रसिक सुकुमारी करौ विनती कर जोरि

Vinay Kundaliyan — श्री अलबेली अलि

Verse 9 of 11

मो सौ नहिं कोऊ पातकी, तुमसौ अधम उधारि। तुम हौ तैसी कीजियौ, अहो रसिक सकुँवारि॥ - श्री अलबेली अलि, विनय कुंडलियाँ (17) तुम सौ नहीं, सौ हो, बुरे आदमी हो। तुम हो तैसी किजियौ, अहो रसिक सकुवारी.. - श्री अलबेली अली, विनय कुंडलिया (17)
अहो रसिक सुकुमारी करौ विनती कर जोरिअहो रसिक सुकुमारी करौ विनती कर जोरि