जो क्रीड़ा वृन्दावन कीनी राधे सुंदरश्याम
Vishisht Doha — श्री रूपरसिक देवाचार्य
Verse 3 of 7
जय जय जय वृन्दाविपिन, जुगलकेलि-आगार।
ताकी महिमा कहनको, हारे वेद हजार॥
- श्री रूपरसिक देवाचार्य, विशिष्ट दोहा (4)
जय जय जय वृन्दाविपिन, जुगलकेलि-आगर। ताकी महिमा कहानाको, हरे वेद हजार.. - श्री रूपरासिक देवाचार्य, विशिष्ट दोहा (4)