जो क्रीड़ा वृन्दावन कीनी राधे सुंदरश्याम
Vishisht Doha — श्री रूपरसिक देवाचार्य
Verse 4 of 7
जय वृन्दावनधाम निज, सकल लोक सिरताज।
सर्वेश्वर सर्वेश्वरी, जहाँ रहत जुबराज॥
- श्री रूपरसिक देवाचार्य, विशिष्ट दोहा (2)
सबके मुकुटमणि जय वृन्दावनधाम। सर्वेश्वर सर्वेश्वरी, जहाँ जुबराज बसते हैं.. - श्री रूपरासिक देवाचार्य, विशेष दोहा (2)