प्यारी तेरी चाल चितवन बाँकी
Vitthal Vipul Vani — श्री विट्ठल विपुल देव
Verse 1 of 19
(राग विभास)
आवत लाडिली लाल फूले।
कुंज केली नव रंग बिहारी,
सूरती हिंडोरैं झूले॥ [1]
निसी जागे अलसात रंगमगे,
पट पलटे गति भूले। [2]
श्रीबीठलबिपुल पुलकि ललितादिक,
दिन देखत द्रुम मूले। [3]
- श्री विठ्ठल विपुल देव जी, श्री विट्ठल विपुल देव जू की बानी (3)
(राग विभासा) आवत लाडिली लाल फुले। कुंज केलि नव रंग बिहारी, सुरति हिंदोरैं झूले..[1] निसि जागे अलसत रंगमगे, पट तालु गति भूले। [2] श्रीबिथलाबिपुल पुलकि ललितादिक, दीन देखत द्रुम मुले। [3] - श्री विट्ठल विपुल देव जी, श्री विट्ठल विपुल देव जू की बानी (3)