जिन रूठौ लागौं तिय पैयाँ
Vitthal Vipul Vani — श्री विट्ठल विपुल देव
Verse 2 of 19
(राग केदारौ)
जिन रूठौ लागौं तिय पैयाँ।
तेरे तन की सोभा सुंदरि,
मेरे उर लागति है झैयाँ॥ [1]
तन मन वारौं एक रोम पर,
मेरौ मन लाग्यौ तो तैयाँ।
श्रीबीठलविपुल विनोद बिहारी
संभ्रम गयौ लाइ उर लैयाँ॥ [2]
- श्री विठ्ठल विपुल देव जी, श्री विट्ठल विपुल देव जू की वाणी (34)
(राग केदारौ) जिन रूठौ लगौं ति पइयाँ। तेरे तन की सुन्दरता सुन्दर है, मुझे उस पर झाइयाँ लगती हैं.. [1] तन-मन का रोम-रोम, अगर मैं तेरी ओर आकर्षित हो जाऊँ। श्रीबिट्ठलविपुल विनोद बिहारी सभ्रम गयौ लै उर लइयां.. [2] - श्री विट्ठल विपुल देव जी, श्री विट्ठल विपुल देव जू की वाणी (34)