आज बनी लाड़िली प्रीतम संग आवति

Vitthal Vipul Vani — श्री विट्ठल विपुल देव

Verse 19 of 19

(राग विभास) आज बनी लाड़िली प्रीतम संग आवति। [1] सौंधे भींजी लट छूटीं, पिय के अंस भुज पाछैं, सखी सुघर विभासहिं गावति॥ [2] स्रम जल बिंदु निसि के सुख सूचत, मोहन बदन सों बदन मिलावति। [3] श्रीबीठलविपुल कल रसिक बिहारी लाल, आनंद समुद्र मथि मदन झिलावति॥ [4] - श्री विठ्ठल विपुल देव जी, श्री विट्ठल विपुल देव जू की बानी (2) (राग विभास) आज बानी लड़ैली आती है प्रीतम के साथ. [1]. [3] श्री विट्ठल विपुल काल रसिक बिहारी लाल, आनंद समुद्र मठी मदन झिलावटी.. [4] - श्री विट्ठल विपुल देव जी, श्री विट्ठल विपुल देव जू की बानी (2)
प्यारी तेरे नैननि पर तृण टूटत