आगे की आगे गई अब न रुखाई देहु

Vivek Lakshan Beli — श्री चाचा हित वृंदावनदास

Verse 4 of 7

राधापति गति एक तुम, मोकौं और न ठाउँ। ‘वृन्दावन हित’ रावरी, टहल देहु बलि जाउँ॥ - श्री वृंदावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (107) राधापति गति तुम एक हो, तुम दूजा न कोय। 'वृन्दावन हित' रावरी, टहल देहु बाली जौन.. - श्री वृन्दावन दास चाचा जी, विवेक लक्षण बेली (107)
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