करैं मनोरथ पिय के जो कछु उपजै जीय
Vrindavan Madhuri Md — श्री माधुरी दास
Verse 4 of 5
वृंदावन की माधुरी, मन को मन हर लेत।
अपने सहज सुभावते, सब अंगन सुख देत॥
- श्री माधुरी दास, वृंदावन माधुरी (21)
वृन्दावन की मधुरता मन को मोह लेती है। यह अपने प्राकृतिक सौन्दर्य से पूरे प्रांगण को आनंदित कर देता है.. - श्री माधुरी दास, वृन्दावन माधुरी (21)