करैं मनोरथ पिय के जो कछु उपजै जीय
Vrindavan Madhuri Md — श्री माधुरी दास
Verse 3 of 5
करैं मनोरथ पिय के, जो कछु उपजै जीय।
पौढ़ि प्रिया उछंग में, पांय पलोटत पीय॥
- श्री माधुरी दास, वृंदावन माधुरी (78)
ख्वाहिशों को निगल जाऊंगा, जो निकलेगा उसे जी लूंगा। उछंग में प्रिया को रोपा, खेल-खेल में पानी पिया.. - श्री माधुरी दास, वृन्दावन माधुरी (78)