यदैव सच्चिद्रसरूप
Vrindavan Mahimamrita — श्री प्रबोधानन्द सरस्वती
Verse 21 of 124
श्रीवृन्दावन जीवना इह महाभागा यदा जीवना दप्येते वत वल्लभा नहि तथा वृन्दाटवी दुर्लभा।
तादृक्सत्तम सत्कृपात उदिता वृन्दावने चेन्महा प्रीति स्तर्ह्यचिरेण सापि सुलभा वृन्दावनाधीश्वरी॥
- श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (13.6)
श्री वृन्दावन जीवन इह महाभागा यदा जीवन दप्यते वट वल्लभा नहिं एवं वृंदातवी दुर्लभ। तदृक्सत्तम सत्कृपात् उदिता वृन्दावन चेन्महा प्रीति स्टारह्यचिरेण सप सुलभा वृन्दावनधीश्वरी। - श्री प्रबोधानन्द सरस्वती, वृन्दावन महिमामृत (13.6)