धन धन वृन्दावन जमुना जल पानी
Vrindavan Rahasy Vinoda — श्री अभयराम
Verse 11 of 20
धन धन वृन्दावन की चैंटी।
महाप्रसाद को किनका लैके जाय भिले में बैठी॥ [1]
है गयो ज्ञान ध्यान हृदय में व्याधि जन्म की मैटी।
अभयराम येहूं बड़भागिनि रज में रहैं लपेटी॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (74)
वृन्दावन की समृद्धि और शांति. महाप्रसाद कैसा हो सकता है? मेरे मन में जय पित्त का वास है.. [1] रोग के जन्म से हृदय में ज्ञान और ध्यान चला गया है। अभयराम येहु बड़भागिनी राज पुरुष गायब रहे.. [2] - श्री अभयराम, वृन्दावन रहस्य विनोद (74)