धन धन वृन्दावन की लता प्यारी

Vrindavan Rahasy Vinoda — श्री अभयराम

Verse 14 of 20

धन धन वृन्दावन की लता प्यारी। फूले कदम माधुरी लपटी, कोयल बोलत कारी॥ [1] छहौ राग छत्तीस रागिनी, कुंज-कुंज उच्चारी। ‘अभयराम’ रज वनकी महिमा, देखत हैं पियप्यारी॥ [2] - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (01) धन धन, वृन्दावन की प्यारी लता। कोयल ने पैरों से रेंगते हुए कहा... [1] छः हजार राग, छत्तीस रागिनियाँ, कुंज कुंज उखर। 'अभयराम' देख राजवन की महिमा प्रिये.. [2] - श्री अभयराम, वृन्दावन रहस्य विनोद (01)
धन धन वृन्दावन जमुना जल पानीधन धन वृन्दावन जमुना जल पानी