धन धन वृन्दावन जमुना जल पानी
Vrindavan Rahasy Vinoda — श्री अभयराम
Verse 15 of 20
धन धन वृन्दावन की मालिन प्यारी।
ठाकुर के दरबाजे बैठी, गूंथे माला न्यारी॥ [1]
गूंथे हार बनावै तुर्रा, करैं जीवका भारी।
अभयराम ये हू बड़भागिनि, स्यामा स्याम की प्यारी॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (114)
वृन्दावन के धनी प्रिये। ठाकुर के द्वार पर बैठी गूंथी माला न्यारी है... [1] हर गूंथी माला मेरे जीवन को बोझ बनाती है। अभयराम, यह बड़भागिनी है, स्याम की प्यारी, स्याम.. [2] - श्री अभयराम, वृन्दावन रहस्य विनोद (114)