धन धन वृन्दावन जमुना जल पानी

Vrindavan Rahasy Vinoda — श्री अभयराम

Verse 17 of 20

धन धन वृन्दावन में वसैं कुम्हार। भावैं चाक बनावैं बासन, करुये कुलरा करैं अपार॥ [1] साधु सन्त कौ पानी प्यावैं, इनके कुल को यही विचार। अभयराम एहूँ बड़भागी, सब कौऊ आवैं इनके द्वार॥ [2] - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (98) धन धन वृन्दावन में वसैन कुम्हार। भावैन चक बनावैन बसन, करुए कुलरा करिन अपार.. [1] किस साधु को पानी पीना चाहिए, यह उसके कुल का मत है। अभयराम, मैं बड़ा भाग्यशाली हूं, उसके द्वार पर सारे कौवे आते हैं.. [2] - श्री अभयराम, वृन्दावन रहस्य विनोद (98)
धन धन वृन्दावन जमुना जल पानीधन धन वृन्दावन जमुना जल पानी