धन धन वृन्दावन जमुना जल पानी
Vrindavan Rahasy Vinoda — श्री अभयराम
Verse 18 of 20
धन धन वृन्दाविपिन भई पनिहारी।
प्रात होय जमुना जल न्हावै, सब ही गोप कुमारी॥ [1]
बातें करैं धरैं सिर गागर, चाल चलैं मतवारी।
अभयराम ऐ तो बड़भागिन, स्याम सुन्दर की प्यारी॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (59)
धन धन वृंदाविपिन भाई पनिहारी। सुबह सभी गोपकुमारियों को यमुना जल से स्नान कराया जाता है। अभयराम, हे भगिनी, स्याम सुंदर की प्यारी.. [2] - श्री अभयराम, वृन्दावन रहस्य विनोद (59)