धन धन वृन्दावन जमुना जल पानी

Vrindavan Rahasy Vinoda — श्री अभयराम

Verse 2 of 20

धन धन वृन्दावन जमुना जल पानी। उठे तरंग अंग सों लागे, कटै पाप ज्यों घानी॥ [1] साधु संत अस्नान करत हैं, भजन करत हैं ज्ञानी। अभयराम रज वनकी महिमा, आप करी पटरानी॥ [2] - श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (02) धन धन वृन्दावन जमुना जल जल। उठती तरंगें शरीर को घेर लेती हैं, पाप कट जाते हैं.. [1] साधु-संत आसन करते हैं, ज्ञानीजन भजन गाते हैं। अभयराम राज वानकी महिमा, एपी कारी पतरनि.. [2] - श्री अभयराम, वृन्दावन रहस्य विनोद (02)
धन धन वृन्दावन जमुना जल पानीधन धन वृन्दावन जमुना जल पानी