धन धन वृन्दावन जमुना जल पानी
Vrindavan Rahasy Vinoda — श्री अभयराम
Verse 3 of 20
धन धन वृंदावन के बंदर।
आन कान काहू की नहीं मानें, लूटें सब के अंतर॥ [1]
गैल गिरारे कूदत डोलें, कहा हवेली मंदिर।
अभयराम ये हूँ बड़भागी, या बन के सब बंदर॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (79)
धन धन वृन्दावन के बन्दर। कोई एक कान से नहीं सुनता, सारे भेद चुरा लिये जाते हैं। अभयराम, यही मेरा दुर्भाग्य है, तुम सब वानर बन जाओ.. [2] - श्री अभयराम, वृन्दावन रहस्य विनोद (79)