धन धन वृन्दावन जमुना जल पानी
Vrindavan Rahasy Vinoda — श्री अभयराम
Verse 4 of 20
धन धन वृन्दावन के गदहा प्यारे।
माटी ईंट पीठ पे ढावैं सबके बनावैं द्वारे॥ [1]
गैल घाट में करैं जीवका हौंकत हैं मतवारे।
अभयराम ये हू बड़भागी रज में रहैं बिचारे॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (80)
धन धन वृन्दावन का पसंदीदा गधा है। ईंटों की पगडंडी पर दौड़ता हूं, सबके लिए दरवाजे बनाता हूं.. [1] गेल घाट पर, मैं अपनी जिंदगी का मजाक उड़ाता हूं। अभयराम, मैं दयनीय स्थिति में रहने वाला एक गरीब आदमी हूं.. [2] - श्री अभयराम, वृन्दावन रहस्य विनोद (80)