धन धन वृन्दावन जमुना जल पानी
Vrindavan Rahasy Vinoda — श्री अभयराम
Verse 5 of 20
धन धन वृन्दावन के माछर प्यारे।
साधु सन्त के अङ्ग लगत हैं भजन करावन वारे॥ [1]
जमुना तीर नीर पै बैठें गुञ्जारैं मतवारे।
अभयराम ऐहू बड़भागी रज में रहैं विचारे॥ [2]
- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (73)
धन धन वृन्दावन के मच्छर प्यारे हैं। भजनों से ऐसा लगता है मानों संतों का कारवां चल रहा हो। अभयराम अइहु बड़भागी राजा पुरुष रहे.. [2] - श्री अभयराम, वृन्दावन रहस्य विनोद (73)