एती मति मोपै कहा, सोभा निधि बनराज।

Vrindavan Sata — श्री अलबेली अलि

Verse 9 of 9

एती मति मोपै कहा, सोभा निधि बनराज। ढीठौ कै कछु कहत हौं, आवत नहिं जिय लाज॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (112) अति मति मोपै कहि सोभा निधि बनरज। गुस्ताखी क्या कहूँ, लज्जा लेकर मत जियो.. - श्री ध्रुवदास, बयालिस लीला, वृन्दावन शत लीला (112)
देवी वृन्दाविपिन की, वृन्दा सखी सरूप।