देवी वृन्दाविपिन की, वृन्दा सखी सरूप।

Vrindavan Sata — श्री अलबेली अलि

Verse 8 of 9

देवी वृन्दाविपिन की, वृन्दा सखी सरूप। जिहिंविधि रूचि व्है दुहुँनि की, तिहिं विधि करत अनूप॥ - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (21) देवी वृन्दाविपिन रूप, वृन्दा की सखी। अनूप अपनी पत्नी के हित में जो कुछ भी करता है, जो भी विधि है वह करता है.. - श्री ध्रुवदास, बयालीस लीला, वृन्दावन शत लीला (21)
रूप गुन गंस के हंस अरु मोरएती मति मोपै कहा, सोभा निधि बनराज।