वृंदावनसत

Vrindavan Sata

श्री अलबेली अलि · 9 verses · Braj

  1. 1. रूप गुन गंस के हंस अरु मोर
  2. 2. अनुराग सौं भरी अस रूप गुन खरी अति
  3. 3. रूप गुन गंस के हंस अरु मोर
  4. 4. रूप गुन गंस के हंस अरु मोर
  5. 5. रूप गुन गंस के हंस अरु मोर
  6. 6. प्रेम अनुराग सों चित्त उन्मत्त हवै
  7. 7. रूप गुन गंस के हंस अरु मोर
  8. 8. देवी वृन्दाविपिन की, वृन्दा सखी सरूप।
  9. 9. एती मति मोपै कहा, सोभा निधि बनराज।