- 1. रूप गुन गंस के हंस अरु मोर
- 2. अनुराग सौं भरी अस रूप गुन खरी अति
- 3. रूप गुन गंस के हंस अरु मोर
- 4. रूप गुन गंस के हंस अरु मोर
- 5. रूप गुन गंस के हंस अरु मोर
- 6. प्रेम अनुराग सों चित्त उन्मत्त हवै
- 7. रूप गुन गंस के हंस अरु मोर
- 8. देवी वृन्दाविपिन की, वृन्दा सखी सरूप।
- 9. एती मति मोपै कहा, सोभा निधि बनराज।