इन्द्र-मद-मर्दन दुर्ग
Vrindavan Shataka — श्री लाल बलबीर
Verse 3 of 10
जय जय वृंदावन, जय जय श्री सुखरास।
जय-जय रसिकन प्राण धन, मम उर करहु निवास॥
- श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (4)
जय जय वृन्दावन, जय जय श्री सुखरस। जय-जय रसिकन प्राण धन, मम उर करहु निवास.. - श्री लाल बलबीर जी, वृन्दावन शतक (4)