बडौ रास मंडल इहां सेवित हित हरिवंश
Vrindavan Smarana — श्री हित रूप लाल
Verse 4 of 7
मन अटकौ रै जात है, एक एक ही ठौर।
श्रीवृंदावन वैभव कहौ, कैसे वरनौ और॥
- श्री हित रूप लाल, श्री वृंदावन स्मरण (62)
मन एक जगह अटक जाता है. श्री वृन्दावन की स्तुति कैसे करें, उसका चयन कैसे करें और.. - श्री हित रूप लाल, श्री वृन्दावन स्मरण (62)