बडौ रास मंडल इहां सेवित हित हरिवंश
Vrindavan Smarana — श्री हित रूप लाल
Verse 5 of 7
पग-पग कोटि प्रयाग सम, केलिकुञ्ज के बीच।
मृग तृष्णा जग छोड़कें, वृन्दावन रस सीच॥
- श्री हित रूप लाल, श्री वृंदावन स्मरण (187)
पगा-पग कोटि प्रयाग सम, केलिकुनिस के बीच। मृग तृष्णा जग छोड़केन, वृन्दावन रस सिच.. - श्री हित रूप लाल, श्री वृन्दावन स्मरण (187)