अंत अनंत साधन करै

Vrindavan Vas Avastha — श्री अनन्य अली

Verse 3 of 8

कृपा सागरी नागरी, वेई पूजवैं आश। इहि बल वेपरवाह नित, श्री वृन्दावन वास॥ - श्री अनन्य अली, श्री अनन्य अली जी की वाणी, श्री वृंदावन वास अवस्था (2.97) कृपा करो सागर नगरी को, जलाकर भस्म कर दूँगा तेरी आराधना। यह शक्ति शाश्वत है, श्री वृन्दावन विराजमान है.. - श्री अनन्या अली, श्री अनन्या अली की वाणी, श्री वृन्दावन विराजमान है (2.97)
अंत अनंत साधन करैअंत अनंत साधन करै